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आखिर कà¥à¤¯à¤¾ होता है 'कà¥à¤·à¥à¤ रोग
What Is Leprosy & Symptoms: लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ के मरीज़ों को अकà¥à¤¸à¤° छà¥à¤†à¤›à¥‚त, कोॠऔर सामाजिक बहिषà¥à¤•ार का सामना करना पड़ता है। जागरà¥à¤•ता के अà¤à¤¾à¤µ की वजह से लोगों को लगता है कि यह छूने से फैलता है। जबकि ये बिलà¥à¤•à¥à¤² ग़लत है, संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• बीमारी होने के बावजूद यह छूने या हाथ मिलाने, साथ में उठने-बैठने या कà¥à¤› समय के लिठसाथ रहने से नहीं फैलती। हालांकि, यह संà¤à¤µ है कि लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ पीड़ित वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के साथ लंबे समय तक रहने से परिवार के सदसà¥à¤¯ इसकी चपेट में आ सकते हैं। लेकिन, नियमित रूप से इसका चेकअप और बचाव करने से इससे बचा जा सकता है।
कà¥à¤¯à¤¾ है लोपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ या कà¥à¤·à¥à¤ रोग à¤à¤• जीरà¥à¤£ संकà¥à¤°à¤®à¤£ है, जिसका असर वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की तà¥à¤µà¤šà¤¾, आंखों, शà¥à¤µà¤¸à¤¨ तंतà¥à¤° à¤à¤µà¤‚ परिधीय तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ाओं पर पड़ता है। यह मायकोबैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤® लैपà¥à¤°à¥€ नामक जीवाणॠके कारण होता है। हालांकि यह बीमारी बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• नहीं है, लेकिन मरीज के साथ लगातार संपरà¥à¤• में रहने से संकà¥à¤°à¤®à¤£ हो सकता है।
कैसे फैलता है कà¥à¤·à¥à¤ रोग
लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ पीड़ित वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के खांसने या छींकने पर उसके शà¥à¤µà¤¸à¤¨ तंतà¥à¤° से निकलने वाले पानी की बूंदों में लेपà¥à¤°à¥‡ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ होते हैं। ये बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ हवा के साथ मिलकर दूसरे वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के शरीर में पहà¥à¤‚च जाते हैं। सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के शरीर में पहà¥à¤‚च कर इन बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को पनपने में करीब 4-5 साल लग जाते हैं। कई मामलों में बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को पनपने (इनà¥à¤•à¥à¤¯à¥‚बेशन) में 20 साल तक लग जाते हैं। पà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤®à¤°à¥€ सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ पर लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ की अनदेखी करने से वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ अपंगता का शिकार हो सकता हैं। यह संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• है, पर यह लोगों को छूने, साथ खाना खाने या रहने से नहीं फैलता है। लंबे समय तक संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के साथ रहने से इससे संकà¥à¤°à¤®à¤£ हो सकता है, पर मरीज़ को यदि नियमित रूप से दवा दी जाà¤, तो इसकी आशंका à¤à¥€ नहीं रहती है।
कà¥à¤¯à¤¾ हैं लकà¥à¤·à¤£
1. लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ के पà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤®à¤°à¥€ सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ को टà¥à¤¯à¥‚बरकà¥à¤¯à¥‚लोइड कहा जाता है। इसमें लेपà¥à¤°à¥‡ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ शरीर के हाथ, पैर, मà¥à¤‚ह जैसे à¤à¤•à¥à¤ªà¥‹à¤œ या खà¥à¤²à¥‡ अंगों और उनकी पेरीफेरल नरà¥à¤µà¥à¤¸ या गौण तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ाओं को ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। इसमें बà¥à¤²à¤¡ या ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ की सपà¥à¤²à¤¾à¤ˆ कम होने से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ अंग सà¥à¤¨à¥à¤¨ होने लगते हैं।
2. शरीर की तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर पैच पड़ने लगते हैं या तà¥à¤µà¤šà¤¾ का रंग हलà¥à¤•ा पड़ने लगता है और वह जगह सà¥à¤¨à¥à¤¨ होने लगती है। वहां का सेंसेशन ख़तà¥à¤® हो जाता है। समà¥à¤šà¤¿à¤¤ इलाज न कराने से पैच दूसरे अंगों पर à¤à¥€ होने लगते हैं। पैच वाली सà¥à¤•िन डà¥à¤°à¤¾à¤‡ और हारà¥à¤¡ होने लगती है। किसी à¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार की चोट लगने या दूसरे इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ होने पर उनमें अलà¥à¤¸à¤° हो सकता है।
3. मरीज़ के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ अंग खासकर हाथ और पैर सà¥à¤¨à¥à¤¨ होने से ठंडे और गरà¥à¤® का à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ नहीं होता। यहां तक कि चोट का à¤à¥€ à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ नहीं होता है। गरà¥à¤® चीजों को उठाने या आग सेंकने से उनके हाथ जल जाते हैं। छाले पड़ जाते हैं। घाव हो जाता है, जिससे उनके अंदर की हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ à¤à¥€ जलने लगती हैं और धीरे-धीरे छोटी हो जाती हैं।
4. वैसे ही पैरों के तलवे में सà¥à¤¨à¥à¤¨ होने की वजह से मरीज़ के ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ चलने पर, चोट लगने पर या पतà¥à¤¥à¤° चà¥à¤à¤¨à¥‡ से घाव हो जाते हैं। इसका पता नहीं चल पाने पर घाव गंà¤à¥€à¤° होकर पैरों के शेप बदलने लगते हैं।
आंखों को à¤à¥€ होता है नà¥à¤•सान
1. लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€ के बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ अगर आंख के अंदर चले जाते हैं, तो आंख अंदर से à¤à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो सकती है। आंख लाल हो जाती है और दरà¥à¤¦ à¤à¥€ होने लगता है। यहां तक कि इससे अलà¥à¤¸à¤° à¤à¥€ हो सकता है, जिससे कॉरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ सफेद हो जाता है और दिखना तक बंद हो जाता है। इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को आईराइटिस कहा जाता है।
2. मरीज़ की आंखों में à¤à¥€ तकलीफ हो सकती है। लेपà¥à¤°à¥€ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ उनकी आंख की पà¥à¤¤à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की नरà¥à¤µà¥à¤¸ को अपनी चपेट में ले लेता है। इससे उसकी आंख à¤à¤ªà¤• नहीं पाती है।
3. हमेशा खà¥à¤²à¥€ रहती है। खà¥à¤²à¥€ रहने की वजह से वह हवा के संपरà¥à¤• में आने से डà¥à¤°à¤¾à¤ˆ हो जाती है। उसमें धूल-मिटà¥à¤Ÿà¥€ या कोई à¤à¥€ कण जा सकता है। इसकी वजह से आंख लाल हो जाती है और उसमें पानी निकलने लगता है। दूसरे आंख में कà¥à¤› à¤à¥€ गिरने पर अमूमन हम रगड़ देते हैं, जिससे कॉरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ पर चोट लग सकती है या इंफेकà¥à¤¶à¤¨ हो जाता है।
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